ऊतक क्या है ऊतक के प्रकार what is tissue its types

ऊतक क्या है ऊतक के प्रकार what is tissue its types

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दोस्तों इस लेख के माध्यम से आज आप ऊतक क्या है? ऊतक के प्रकार क्या है? ऊतक किससे बने होते है? ऊतक के कार्य आदि के बारे में जानेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख ऊतक क्या है ऊतक के प्रकार:-

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ऊतक क्या है ऊतक के प्रकार

ऊतक क्या है What is tissue 

ऊतक शरीर की सबसे सरल संरचनात्मक इकाई कोशिकाओं के समूह को कहा जाता है जो संरचना तथा कार्यात्मक दृष्टि से एक ही प्रकार की होती हैं। साधारण भाषा में कह सकते हैं, कि उन विशिष्ट कोशिकाओं का वह समूह है जो संरचना आकृति कार्य उत्पत्ति आदि में एक समान होती हैं उसे हम ऊतक कहते हैं

और उत्तक का अध्ययन जिस विज्ञान की शाखा के अंतर्गत किया जाता है उसे हम ऊतकी (Histology) कहते है। ऊतक विज्ञान के जनक विचाट (Vichat) महोदय है, जिन्होंने ऊतक के बारे में विशिष्ट अध्ययन किया तथा विभिन्न प्रकार की खोज तथा अपनी रिसर्च के बारे में लिखा, जबकि हिस्टोलोजी (Histology) नामकरण 1819 में मायर (Maier) नामक वैज्ञानिक ने किया। 

ऊतक के प्रकार Type of tissue 

जीवधारियों के आधार पर ऊतक दो प्रकार के होते हैं:- 

  1. पादप ऊतक (Plant Tissue) 
  2. प्राणी ऊतक (Animal Tissue) 

पादप ऊतक (Plant Tissue)

उत्तक के कोशिकाओं के विभाजन की क्षमता के आधार पर आधारित पादप ऊतक (Plant Tissue) को दो प्रकारों में बांटा गया है:- 

  1. विभाज्योतिकी ऊतक (Meristematic tissue)
  2. स्थाई ऊतक (Permanent tissue) 

विभाज्योतिकी ऊतक (Meristematic tissue)

यह उन कोशिकाओं के समूह का बना हुआ होता है, जिनमें बार-बार सूत्री विभाजन होता है, अर्थात इस प्रकार के ऊतक में सूत्री विभाजन करने की क्षमता होती है। ऐसे ऊतक की कोशिकाएं जीवित कोशिकाएं होती हैं, जो छोटी अंडाकार तथा विभिन्न आकार की पाई जाती हैं। इनकी कोशिका भित्ति सैलूलोज (Cellulose) की बनी होती है,

जबकि कणयुक्त कोशिका द्रव भरा होता है. इनमें प्रमुख रूप से रसधानी अनुपस्थित होती है और स्पष्ट बड़ा केंद्रक देखने को मिलता है। यह ऊतक स्थिति के आधार पर निम्न तीन प्रकार के होते हैं:- 

  1. शीर्षस्थ विभाज्योतिकी ऊतक (Apical meristem tissue) :- यह ऊतक तने और जड़ के शीर्ष पर पाया जाता है और उस भाग की वृद्धि के लिए उत्तरदाई होता है। इस ऊतक की कोशिकाएं विभाजित होकर स्थाई ऊतक का निर्माण करते हैं और पौधों में प्राथमिक वृद्धि के लिए उत्तरदाई होती हैं।
  2. पाशर्वस्थ विभाज्योतिकी ऊतक (Lateral meristem tissue) :- यह ऊतक जड़ और तने के पाशर्वस्थ भाग में देखने को मिलता है और यह उस जगह की द्वितीयक वृद्धि के लिए आवश्यक माना जाता है। इसमें संवहन ऊतक (Vascular tissue) बनते हैं, जो भोजन जल खनिज का संवहन करने का कार्य करते हैं. संवहन ऊतक उपस्थित होने के कारण यह तने की चौड़ाई में वृद्धि के लिए जाना जाता है।
  3. अंतर्वेशी विभाज्योतिकी ऊतक (Interstitial meristem tissue) :- यह वह होता है, जो स्थाई ऊतक के बीच बीच में देखने को मिलता है। यह पत्तियों के आधार में या टहनी के पर्व के दोनों ओर पाया जाता है और वृद्धि करके स्थाई ऊतक में परिवर्तन करने के लिए जिम्मेदार होता है।

स्थाई ऊतक Permanent tissue

विभाज्योतिकी ऊतक मैं वृद्धि तथा विकास के फलस्वरूप स्थाई ऊतक का निर्माण होने लगता है, जिसमें विभाजन की क्षमता बिल्कुल नहीं होती लेकिन कोशिका का रूप और आकार इन्हीं के द्वारा ही निश्चित किया जाता है। यह मृत सजीव दोनों प्रकार के होते हैं इनकी कोशिका भित्ति पतली होती है, कभी-कभी मोटी भी होती है, इनमें कोशाद्रव्य में बड़ी रासधानी दिखाई देती है, किंतु केंद्रक छोटा होता है, यह दो प्रकार के होते हैं, प्राथमिक और द्वितीयक जिसमें प्राथमिक उत्तक अंतर्वेशी विभाज्योतिकी ऊतक और शीर्षस्थ विभाज्योतिकी ऊतक से मिलने के पश्चात बनता है जबकि द्वितीयक ऊतक पाशर्वस्थ विभाज्योतिकी ऊतक के द्वारा निर्धारित होता है।

संरचना के आधार पर स्थाई ऊतक निम्न दो प्रकार के होते हैं:- 

  1. सरल उत्तक (Simple tissue) 
  2. जटिल ऊतक (Complex tissue) 

सरल उत्तक (Simple Tissue)

यह वह ऊतक होता है, जो एक समान कोशिकाओं के द्वारा निर्मित होता है. यह निम्नलिखित प्रकार के होते हैं..

  1. मृदुतक (Parenchyma) :- यह ऊतक बड़े ही सरल प्रकार का होता है, जिसमें जीवित कोशिकाएं होती हैं और या अंडाकार बहुभुज अनियमित आकार की होती हैं। इनमें एक सघन प्रकार का कुछ का द्रव भरा हुआ होता है, जबकि केंद्रक भी स्पष्ट पाया जाता है।इनकी कोशिका भित्ति पतली होती है, जो सैलूलोज की बनी होती है। यह तने जड़ तथा हरी पत्तियों में पाया जाता है, इसमें क्लोरोफिल (Chlorophyll) नामक पिगमेंट पाया जाता है, जो प्रकाश संश्लेषण के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। उसको हरित ऊतक के नाम से या क्लोरेंनकइमा के नाम से जाना जाता है। इस ऊतक का सबसे प्रमुख काम हरे पौधों की पत्तियों में भोजन निर्माण करना अंतरकोशिकीय गैस का विनिमय करना विभिन्न प्रकार के उत्पाद जैसे कि गोंद, रेजिन, टेनिन आदि को संचित और उत्सर्जित करना होता है।
  2. स्थूलकोण ऊतक (Collenchyma)  :- इस ऊतक की कोशिकाएं केंद्रक युक्त लंबी अंडाकार और कई भुजाओं से निर्मित होती हैं इनमें भी हरित लवक देखने को मिलता है, किंतु भित्ति में किनारों पर सेल्यूलोज होने से स्थूलन भी दिखाई देता है यह ऊतक पौधों के नए भागों में अधिकतर पाया जाता है, जो विशेष रूप से तने में देखने को मिलते हैं. इस ऊतक का प्रमुख कार्य पौधों को यांत्रिक सहायता प्रदान करना और भोजन का निर्माण करना होता है।
  3. दृढ ऊतक (Sclerenchyma) :- इस प्रकार के ऊतक की कोशिकाएं निर्जीव लंबी और नुकीली होते हैं, इनमें जीवद्रव्य ना के बराबर या फिर होता ही नहीं है। इस प्रकार के ऊतक के प्रमुख रूप से बीजों के आवरण नारियल के बाहरी रेशेदार बीजों के खोल पतियों के सिरा फलों आदि में देखने को मिलता है, जिसका प्रमुख कार्य पौधों को यांत्रिक सहारा देना पौधों के अंदर के भागों की रक्षा करना होता है।

जटिल ऊतक (Complex tissue) 

जटिल ऊतक वे होते है, जो दो या दो से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलने के पश्चात बनते हैं, उनको जटिल स्थाई ऊतक कहते हैं। यह एक इकाई के रूप में एक साथ कार्य करते हैं और खनिज लवण तथा जल और खाद पदार्थों को पौधों के विभिन्न अंगों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं, यह ऊतक दो प्रकार के होते हैं:- 

1. जाइलम (Xylem)

यह जटिल ऊतक का सबसे अच्छा प्रकार है क्योंकि यह पौधों की जड़ तना तथा पत्तियों में अर्थात पौधे के सभी भाग में पाया जाता है और इसका कार्य पौधे के समस्त भागों में जल और खनिज लवणों का परिवहन करना होता है, यह प्रमुख रूप से निम्न चार प्रकार के तत्वों से निर्मित हुआ है:- 

  1. वाहिनियाँ (Tracheids) :- इनकी कोशिका मृत लंबी जीवद्रव्य रहित दोनों सिरों पर पतली और नुकली होती हैं। यह पौधों को यांत्रिक सहारा देने के साथ ही जल को तने द्वारा जड़ से तने तक पहुंचाने का कार्य करते हैं।
  2. वाहिकायें (Vessels)  :- इनकी कोशिकाएँ भी मृत लंबी होती है, जो आकार में सर्पिलाकार सीडीनुमा और बलयाकर होती हैं जो प्रायः आवृत्तबीजी पौधों के प्राथमिक एवं द्वितीयक जाइलम में देखने को मिलती हैं और पौधों की जड़ से जल एवं खनिज लवण को पत्ती तक पहुंचाते हैं।
  3. जाइलम तंतु (Xylem Fibres) :- यह लंबे शंकु के समान वाले मृत कोशिका होते हैं, तथा द्विबीजपत्री पौधों में पाए जाते हैं और यांत्रिक आलंबन का कार्य करते हैं।
  4. जाइलम मृदुतक (Xylem parenchyma) :- ऊतक की कोशिकाएं जीवित कोशिकाएं होती हैं, जो भोजन संग्रह करने का कार्य करती हैं।

2. फ्लोएम (Phloem)

जाइलम ऊतक की तरह ही पेड़ पौधों की पत्तियों जड़ तने में पाए जाने वाला उत्तक होता है, जिसका प्रमुख कारण पत्तियों द्वारा भोजन तैयार होने पर भोजन को पेड़ पौधों के विभिन्न भागो तक पहुंचाने का होता है। यह प्रमुख रूप से निम्नलिखित चार तत्वों से निर्मित होता है:- 

  1. चालनी नालिकायें (Sieve tubes) :- यह लंबी बेलनाकार क्षेत्रमिति वाली कोशिकाएं होते हैं, जो एक दूसरे पर व्रत के समान लगी रहती हैं। यह संवहनी पौधों के फ्लोएम में पाई जाती हैं इस नालिका द्वारा तैयार भोजन पत्तियों से संख्या अंग और संख्या अंग पर पौधों की वृद्धि क्षेत्र में जाता है।
  2. सह कोशिकाएं (Companion cells) :- यह चालनी कोशिकाओं के पाशर्व भाग में स्थित होती हैं, जो लंबी और जीवित होती हैं, जिनमें केंद्रक और जीवद्रव पाया जाता है। इनका प्रमुख कार्य चालिनी कोशिकाओं में भोज पदार्थों का संवहन करने में मदद करना होता है।
  3. फ्लोएम तंतु (Phloem Fibres) :- यह लंबी दृढ़ एवं स्केलेरनकाइमेंटस कोशिकाओं से बना होता है, जो फ्लोएम उत्तक को यांत्रिक सहारा प्रदान करने का कार्य करता है।
  4. फ्लोएम मृदुतक (Phloem Parenchyma) :- यह जीवित कोशिकाओं से मिलकर बना होता है, जो केंद्रक युक्त होती हैं। यह सह कोशिकाओं के निकट स्थित होती हैं और भोज पदार्थ के संग्रहण में मदद करती हैं।

जंतु ऊतक के प्रकार Type of Animal tissue 

जंतु ऊतक निम्न प्रकार के होते हैं:-

उपकला या एपिथीलियम ऊतक Epithelium tissue

यह वे ऊतक होते हैं, जो शरीर की बाहरी परत जबकि आंतरिक अंगों की भीतरी परत का निर्माण करते हैं। इस प्रकार के ऊतकों में अंतरकोशिकी स्थान (Inter cellular Space) नहीं पाए जाते यह शरीर के अंगों की रक्षा करने का कार्य करते हैं और विसरण, श्रावण, अवशोषण आदि में सहायता करते हैं एपिथीलियम ऊतक निम्न प्रकार के होते हैं:- 

  1. शल्की एपीथिलियम (Squamous Epithelium) :- यह वे ऊतक होते हैं, जिनकी कोशिकाएं चपटी और अत्यधिक पतली होती हैं। इनमें पाया जाने वाला केंद्रक (Nucleus) भी चपटा होता है। यह कोशिकाएंँ त्वचा की बाहरी परत का निर्माण करने का कार्य करते हैं। इस ऊतक के द्वारा मुख गुहा के साथ ही आहारनाल (Alimentary Canal) के स्तर बने हुए होते हैं, इसका सबसे प्रमुख कार्य आंतरिक अंगों को सुरक्षा प्रदान करना तथा रक्त वाहिनीयों में और वायुकोष्ठों में पदार्थों के विसरण में सहायता प्रदान करना होता है।
  2. स्तंभाकार एपीथिलियम (Columnar Epithelium) :- इस प्रकार की कोशिकाओं से निर्मित ऊतक प्रमुख रूप से उन स्थानों पर पाए जाते हैं जहां पर अवशोषण का कार्य होता है, क्योंकि इन कोशिकाओं के मुक्त सिरे पर छोटे-2 रोम रसांकुर पाए जाते हैं। यह ऊतक छोटी आत का भीतरी स्तर बनाने का कार्य करते हैं, तथा अवशोषण और श्रावण के लिए उत्तरदाई तथा अंगों को यांत्रिक सहारा देते हैं।
  3. घनाकार एपीथिलियम (Cuboidal Epithelium) :- इस प्रकार के ऊतक की कोशिकाएं घनाकार होती हैं और इनमें गोल केंद्रक पाया जाता है। इस प्रकार की कोशिकाओं से निर्मित ऊतक श्वेद ग्रंथियों, वृक्क नालिकाओं तथा लार ग्रंथियों (Salivary Gland) में पाई जाती हैं, जहां पर यह अवशोषण श्रावण के साथ ही अंगों को यांत्रिक सहारा प्रदान करती हैं।
  4. पक्षमल एपीथिलियम (Ciliated Epithelium) :- यह वे ऊतक होते हैं, जिनमें स्तंभाकार और घनाकार दोनों प्रकार की कोशिकाएं पाई जाती हैं, जिनकी मुक्त सतह पर सीलिया (Cilia) होते हैं, जिनका कार्य कणो मुक्त कोशिकाओं अथवा म्यूकस में एपीथिलियम सतह के ऊपर विशिष्ट दिशा में गति कराना होता है जबकि यह अंडवाहिनी श्वास नली तथा मुख गुहा में पाई जाती हैं।

संयोजी ऊतक Connective tissue 

संयोजी ऊतक वे ऊतक होते हैं, जो संपूर्ण शरीर से जुड़े हुए होते हैं तथा उन्हें कुछ सहारा भी देते हैं। इस प्रकार के ऊतक में कोशिकाएँ तो कम होती हैं, किंतु अंतरकोशिकीय पदार्थ अधिक देखने को मिलता है, जिसे मैट्रिक्स कहा जाता है, तथा यह जेली की समांतरल सघन कठोर भी हो सकता है। संयोजी ऊतक आंतरिक अंगों के रिक्त स्थानों में भी पाई जाती है, इसके अलावा यह रक्त नालिकाओं और तंत्रिका के चारों ओर, जबकि अस्थि मज्जा में उपस्थित होती है। 

संयोजी ऊतक निम्न तीन प्रकार के होते हैं

1. वास्तविक संयोजी ऊतक Connective tissue proper 

वास्तविक संयोजी ऊतक के अंतर्गत एरियॉलर ऊतक वसा संयोजी ऊतक श्वेत तंतुमय ऊतक, पीला तंतुमय ऊतक तथा जालवत संयोजी ऊतक आते हैं, जिनका कार्य त्वचा और मांसपेशियों को जोड़ना एंटीबॉडी (Antibody) का संश्लेषण करना वाहरी चोटों से अंगों की रक्षा करना टेंडन और लिगामेंट का निर्माण करना आदि होते हैं।

2. कंकाल ऊतक Skeletal Tissue 

कंकाल ऊतक शरीर को सहारा प्रदान करने के लिए तथा शरीर को एक ढांचा आकार प्रदान करने के लिए होता है और यह शरीर को मजबूती से जोड़ता है। कंकाल अक्सर हमारे शरीर के अंदर पाया जाता है, जो शरीर के अंतः कंकाल का निर्माण करता है। यह कशेरुकी जंतुओं का विशेष लक्षण होता है, जो कोमल अंगों जैसे मस्तिष्क आदि की रक्षा करता है,  कंकाल ऊतक दो प्रकार का होता है:- 

  1. उपास्थि उत्तक (Caetilaginous tissue) :- उपास्थि ऊतक का मैट्रिक्स लक्ष्य सा होता है, जिसमें बहुत ही पतली और महीन कॉलेजन तंतु (Collagen fibre) उपस्थित होते हैं। इस उत्तक के मैट्रिक्स की रचना एक प्रकार की प्रोटीन से बनी हुई होती हैं, जिसको कॉन्ड्रिन (Chondrin) कहा जाता है। इसमें कोशिकाएं तो रहती हैं, जिसे कोंडियोयोब्लास्ट कहते है। उपास्थि का कार्टिलेज हड्डियों के जोड़ को चिकना बनाता है यह बाह्य कर्ण, नाक श्वासनली, कंठ स्टरनम तथा अंतर कशेरुकी स्थानों में पाई जाती है।
  2. अस्थि (Bone)  :- अस्थि की कोशिकाओं को ओस्टियोब्लास्ट के नाम से जाना जाता है, जिनमें कठोर मैट्रिक्स होता है। यह मैट्रिक्स कैल्शियम और फास्फोरस की लवण के द्वारा निर्मित होता है। अस्थियो के मध्य में एक के खोखले गुहा होती है, जिसमें अस्थि मज्जा (Bone Marrow) कहते है।

3. तरल संवहन उत्तक Fluid vascular tissue 

रुधिर एवं लसीका को तरल संयोजी ऊतक के नाम से जाना जाता है, कियोकि इसका अंतर कोशिकीय पदार्थ तरल होता है, जिसमें कोशिकाएं बिखरी रहती हैं। इस कारण इसे सरल संयोजी ऊतक कहा जाता है। तरल संयोजी उत्तक के अंतर्गत रुधिर का वह भाग जो बहता है, जिसे प्लाज्मा (Plasma) कहते है, जिसमें रुधिर कोशिकाएं बहती हैं।प्लाज्मा हल्के पीले रंग का चिपचिपा गाढ़ा सा पदार्थ होता है जो 55% भाग रुधिर का होता है, शेष 45% भाग कणिकाएँ होती हैं, जो लाल रक्त कणिका (Red blood cell) श्वेत रक्त कणिका (White blood Cell) और बिम्बाणु (Plateles) में होती हैं।

पेशी ऊतक Muscular tissue 

चलने फिरने तथा भिन्न भिन्न प्रकार की गतियाँ करने के लिए पेशी ऊतक होते हैं। पेशी ऊतक पेशी कोशिकाओं से निर्मित होते हैं, इस प्रकार की ऊतक की कोशिकाएं लंबी होती हैं। इन कोशिकाओं के भीतर पाए जाने वाले तरल को सार्कोप्लाज्म (Sarcoplasm) के नाम से जाना जाता है, जिसमें सार्कोप्लास्मिक केंद्रक भी होते हैं। शरीर के कार्य करने की गति और उसकी आकृति के आधार पर पेशी ऊतक तीन प्रकार के होते हैं:- 

  1. रेखित पेशी ऊतक (Voluntary Muscles) :- रेखित पेशी ऊतक को ऐक्छिक पेशी ऊतक भी कहते है, कियोकि यह हमारे इक्छा पर निर्भर करती है अर्थात इच्छा द्वारा कार्य करती है, यह पेशी ऊतक हड्डियों से जुडी होती है और हाँथ पैर जैसे अंगों में पायी जाती है।
  2. आरेशित पेशी ऊतक (Involuntary Muscles) :- इनको अनैक्छिक पेशी ऊतक कहा जाता है, कियोकि यह प्रमुख रूप से हमारी इच्छा अनुरूप कार्य नहीं करती है। यह पेशी ऊतक हमारे शरीर के आंतरिक अंगों में पायी जाती है।
  3. हृदय पेशी ऊतक (Cardiac Muscles) :- आरेशित पेशी ऊतक से ही हृदय पेशी ऊतक का निर्माण होता है, जो ह्रदय में पायी जाती है।

तंत्रिका ऊतक Nervous tissue 

शरीर के सभी अंगों और कार्यों में एक सामंजस्य स्थापित करने के लिए तंत्रिका ऊतक होते हैं। जंतुओं के शरीर के मस्तिष्क और मेरुरज्जु तथा तंत्रिका तंत्र का निर्माण तंत्रिका उत्तक करते है। तंत्रिका ऊतक संवेदना को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में भेजने का कार्य करते हैं तंत्रिका उत्तक की सबसे छोटी इकाई न्यूरॉन या तंत्रिका कोशिका होती है, जिसके प्रमुख भाग साइटोन (Cyton) डेंड्रोन (Dendron) और एक्सॉन (Axon) होते हैं।

दोस्तों यहाँ पर आपने ऊतक क्या है ऊतक के प्रकार (what is tissue its types) पादप ऊतक क्या है पादप ऊतक के प्रकार, जंतु ऊतक क्या है, जंतु ऊतक के प्रकार के साथ अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को पढ़ा। आशा करता हुँ आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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