फीता कृमि के लक्षण Symptoms of a tapeworm

फीता कृमि के सामान्य लक्षण Symptoms of a tapeworm

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख फीता कृमि के लक्षण (Symptoms of a tapeworm) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आज आप फीता कृमि के बारे में जानेंगे, कि फीता कृमि क्या है? फीता कृमि का वर्गीकरण कैसा है? फीता कृमि के सामान्य लक्षण कैसे हैं और फीता कृमि कहाँ पाया जाता है? तो आइए दोस्तों बढ़ते हैं और पढ़ते हैं, यह लेख फीता कृमि क्या है? फीता कृमि के लक्षण:-  

फीता कृमि के लक्षण

फीता कृमि क्या है what is tapeworm

फीता कृमि ऊतकीय स्तर का चपटा फीते के समान अधिकतम 9 मीटर लम्बा अन्तः परजीवी होता है, जो संघ प्लेटीहेलमाइंथेस (Platyhelminthes) के अंतर्गत आता है।

फीता कृमि को टेपवर्म भी कहते है, जबकि फीता कृमि का वैज्ञानिक नाम टीनिया सोलियम (Tinea solium) होता है, जो मनुष्य तथा अन्य स्तनधारियों में अन्तःपरजीवी के रूप में पाया जाता है,

तथा कुपोषण, एलर्जी, आंतो के और पेट के कई गंभीर रोगों के लिए उत्तरदायी होता है, और लंबे समय से ग्रसित रहने के कारण लिवर, ह्रदय, फेफड़े, तथा मस्तिष्क को भी प्रभावित करने लगता है।

फीता कृमि का वर्गीकरण Classification of tapeworm 

फीताकृमि मनुष्य की आँत में पाया जाने वाला एक अंत:परजीवी होता है, जो संघ प्लेटीहेलमाइंथेस के वर्ग सिस्टोडा से संबंध रखता है।

फीता कृमि का वैज्ञानिक नाम (Tinea Solium) टैनिया सोलियम होता है, जिसमें टीनिया फीता कृमि के वंश के नाम से और सोलियम फीता कृमि के जाति के नाम से लिया गया है। फीता कृमि का वर्गीकरण निम्न प्रकार से है:- 

संघ (Phylum) :- प्लेटीहेलमाइंथेस (Platyhelminthes)
वर्ग (Class) :- सिस्टोडा (Sistoda)
जाति (Species) :- सोलियम (Solium)
गण (Order) :- साइक्लोफाइलीडिया (Cyclophyllidea)
वंश (Genus) :- टीनिया (Taenia)

फीता कृमि के लक्षण Symptoms of a tapeworm

  1. फीताकृमि अन्तः परजीवी के रूप में मनुष्य और सूअर की आँत में पाया जाता है।
  2. फीता कृमि (टीनिया सोलियम) लगभग 2 से 3 मीटर तक लंबा चपटा और फीते जैसी संरचना वाला होता है।
  3. इस जीव का शरीर घुंडीनुमा सिर छोटी सी ग्रीवा तथा स्ट्रोबीला में बँटा रहता है। स्ट्रोबीला में लगभग 800 से 1000 तक देहखंड होते हैं, जिन्हें प्रोग्लोटिड्स (Proglottids) कहते हैं।
  4. फीता कृमि के सिर पर पोषक की आँत से चिपकने के लिए कंटक युक्त रोस्टेलम तथा चार चूषक उपस्थित होते है।
  5. यह कृमि शरीर की सतह से तरल पोषक पदार्थों को विसरण विधि के द्वारा ग्रहण करते हैं, इसमें पूर्ण विकसित पाचन तंत्र का अभाव होता है।
  6. उत्सर्जन ज्वाला कोशिकाओं तथा स्ट्रोबिला के पश्रवों में फैलाव इससे सम्बंधित उत्सर्जी नालिकाओं द्वारा होता है।
  7. परिसंचारी तंत्र, तथा शवशन तंत्र अनुपस्थित तथा जीवन-वृत्त द्विपोषदीय होता है।
  8. यह प्राणी उभयलिंगी होता है, जिसके प्रत्येक देहखंड में पूर्ण विकसित द्विलिंगी जनन तंत्र होता है।
  9. यह कृमि टीनिया सोलियम मनुष्य में टीनियेसिस (Taeniasis) सिस्टीसरकोसिस (Cysticercosis) रोग उत्पन्न करता है।

फीता कृमि का जीवन चक्र Life Cycle of Tapeworm 

फीता कृमि अर्थात टीनिया सोलियम का जीवन चक्र दो पोषकों प्राथमिक पोषक मनुष्य और द्वितीयक पोषक सूअर में पूरा होता है। जब मनुष्य कच्चे या अधपके सूअर के मांस का सेवन करते हैं

जिसमें सिस्टिकेरसी (लार्वा) होता है उसको अंतर्ग्रहण कर लेते है इसके बाद, शरीर में सिस्ट बाहर निकल जाते हैं, उनके स्कोलेक्स द्वारा छोटी आंत से जुड़ जाते हैं, और लगभग 2 महीनों में वृद्धि तथा विकास करके वयस्क कृमियों में परिपक्व हो जाते हैं।

अब वयस्क टैपवर्म प्रोग्लॉटिड्स (Proglottids) का उत्पादन करते हैं, जो गुरुत्वाकर्षण बन जाते हैं; वे टैपवार्म से अलग हो जाते हैं और गुदा में चले जाते हैं।

इसके पश्चात् पृथक हुए प्रोग्लॉटिड, अंडे, या दोनों मल में निकाल दिए जाते है। अब सूअर या मनुष्य भ्रूण के अंडे या ग्रेविड प्रोग्लॉटिड्स (जैसे, फेकली दूषित भोजन में) के अंतर्ग्रहण से संक्रमित हो जाते हैं।

मनुष्यों में स्व-संक्रमण हो सकता है यदि प्रोग्लोटिड रिवर्स पेरिस्टलसिस (Peristalsis) के माध्यम से आंत से पेट तक जाते हैं। अंडे के अंतर्ग्रहण के बाद, वे आंत में हैच करते हैं और ओंकोस्फीयर छोड़ते हैं,

जो आंतों की दीवार में प्रवेश करते हैं। ओंकोस्फीयर रक्तप्रवाह के माध्यम से धारीदार मांसपेशियों और मस्तिष्क, यकृत और अन्य अंगों तक जाते हैं, जहां वे सिस्टिकेरसी में विकसित होते हैं। सिस्टीसर्कोसिस (Cysticercosis) का परिणाम हो सकता है।

यहाँ पर आपने फीता कृमि के लक्षण (Symptoms of a tapeworm) के साथ फीता कृमि के सामान्य लक्षण, फीता कृमि का लक्षण अन्य तथ्य पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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